टीकमगढ़ जिले के बड़ागांव धसान स्थित सांदीपनि विद्यालय का हॉल गुरुवार को सेवा यात्रियों और स्थानीय नागरिकों से भरा रहा। मौका था सेवा संकल्प संवाद कार्यक्रम का, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से वर्चुअली जुड़े। उन्होंने यात्रा में शामिल सेवा यात्रियों से सीधा संवाद किया और पूछा कि रास्ते में वे किस तरह के सेवा कार्य कर रहे हैं तथा लोगों से मिलकर उन्हें क्या अनुभव हुए।

कार्यक्रम में जतारा विधायक हरिशंकर खटीक, सरोज राजपूत, पूर्व विधायक राकेश गिरी गोस्वामी, लक्ष्मी गिरी और संकल्प जैन सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। हॉल में बड़ी संख्या में नागरिक भी पहुंचे।

वाराणसी से बड़नगर तक की यात्रा

सेवा यात्रियों ने प्रधानमंत्री को बताया कि यह यात्रा वाराणसी से शुरू होकर बड़नगर तक जा रही है। इस दौरान उन्हें अलग-अलग क्षेत्रों की संस्कृति, परंपराओं और जनसेवा के विविध रूपों को नज़दीक से देखने का अवसर मिला। यात्रियों के मुताबिक हर पड़ाव पर स्थानीय जीवन को समझने का मौका मिल रहा है।

बुंदेलखंड में प्रवेश का अनुभव उन्होंने अलग से साझा किया। यात्रियों ने बताया कि यहां स्थानीय लोगों ने जिस आत्मीयता और स्नेह के साथ उनका स्वागत किया, वह उनके लिए विशेष रहा। बुंदेली संस्कृति से परिचय के साथ उन्होंने पारंपरिक बुंदेली व्यंजनों का स्वाद भी लिया और इसे यात्रा की सुखद स्मृतियों में गिनाया।

अभियान एक महीने तक चलेगा

जतारा विधायक हरिशंकर खटीक ने बताया कि सेवा संकल्प अभियान-2026 का आयोजन 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक किया जा रहा है। इसी के अंतर्गत सेवा संकल्प यात्रा, जिसे जन जल सेवा संकल्प यात्रा भी कहा जा रहा है, अलग-अलग सेवा गतिविधियों के जरिए स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और जनसेवा का संदेश दे रही है।

सेवा यात्रियों ने संवाद में कहा कि यात्रा के माध्यम से उन्हें जनसेवा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सहभागिता के अलग-अलग पहलुओं को करीब से देखने और खुद सेवा कार्यों में हिस्सा लेने का अवसर मिल रहा है।

वृक्षारोपण के बाद आगे बढ़ी यात्रा

संवाद कार्यक्रम के बाद सेवा यात्रियों ने सांदीपनि विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण किया और प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। इसके बाद यात्रा समर्रा होते हुए उत्तर प्रदेश की सीमा की ओर रवाना हो गई।

अभियान 17 अक्टूबर तक चलना है, इसलिए यात्रा के मार्ग में पड़ने वाले गांवों और कस्बों के लोग आगे भी स्वच्छता, जल संरक्षण और वृक्षारोपण जैसी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और यात्रा दल से कार्यक्रम की जानकारी ली जा सकती है।