मुरैना के आई-9 पिपरसेवा औद्योगिक क्षेत्र में रहने वाले 42 वर्षीय अभिषेक श्रीवास्तव के सामने कुछ साल पहले सवाल हुनर का नहीं, पूंजी का था। वे अपना काम शुरू करना चाहते थे, पर मशीनरी और इकाई खड़ी करने के लिए जरूरी रकम जुटाना सबसे बड़ी अड़चन थी। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) से मिली मदद ने यह अड़चन हटाई और आज वे 'बंगलामुखी इंटरप्राइजेज' के नाम से सरसों तेल की इकाई चला रहे हैं।
जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार इस इकाई से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 10 से 12 लाख रुपये की आय हो रही है और चार लोगों को रोजगार मिला है। उत्पाद की बिक्री मुरैना के साथ आसपास के जिलों में भी हो रही है।
18 लाख की मदद, जिसमें 7 लाख अनुदान
स्नातक तक पढ़े अभिषेक लंबे समय से ऐसा काम शुरू करना चाहते थे जिसमें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कच्चे माल का उपयोग हो सके। सरसों से तेल तैयार करने का विचार उन्हें इसी वजह से उपयुक्त लगा, लेकिन प्रारंभिक और कार्यशील पूंजी की व्यवस्था आसान नहीं थी। इसी दौरान उन्हें पीएमएफएमई योजना की जानकारी मिली और उन्होंने आवेदन किया।
योजना के तहत उन्हें उद्यम स्थापित करने के लिए 18 लाख रुपये स्वीकृत होकर वितरित हुए, जिसमें 7 लाख रुपये का अनुदान शामिल है। यह वित्तीय सहयोग कैनरा बैंक की गोले का मंदिर शाखा, ग्वालियर से मिला। रकम मिलने के बाद अभिषेक ने जरूरी मशीनरी लगाई और इकाई की शुरुआत की।
किसान से सरसों, बाजार तक बोतल
इकाई में किसानों से सीधे सरसों खरीदी जाती है। एक्सपेलर की मदद से तेल निकाला जाता है और फिल्टर से गुजारकर उसे तैयार किया जाता है। इसके बाद 500 मिलीलीटर, एक लीटर और पांच लीटर की प्लास्टिक बोतलों तथा 15 लीटर के टीन में पैकिंग होती है।
उत्पाद ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए अभिषेक ने स्थानीय बाजार के साथ ऑनलाइन माध्यम का भी उपयोग शुरू किया है। उत्पादन से लेकर पैकेजिंग और बाजार तक की गतिविधियां वे खुद संभालते हैं। मुरैना से आसपास के जिलों तक उत्पाद की पहुंच धीरे-धीरे बढ़ी है।
अभिषेक का कहना है कि शुरुआत में सबसे बड़ी चिंता पूंजी की ही थी। योजना से आर्थिक सहायता मिलने के बाद मशीनरी लगाकर काम शुरू हुआ और अब व्यवसाय से होने वाली आय से परिवार को आर्थिक संबल मिला है। इकाई को आगे और विस्तार देने की दिशा में वे प्रयास कर रहे हैं — यह अभी योजना है, जिस पर काम चल रहा है।
चार परिवारों की आजीविका भी जुड़ी
इकाई से जुड़े चार लोगों के परिवारों के लिए भी यह रोजगार का सहारा बना है। यानी एक व्यक्ति के आत्मनिर्भर बनने का प्रयास अब कुछ और घरों की आमदनी से जुड़ गया है। मुरैना और अंचल में सरसों की खेती को देखते हुए ऐसी छोटी प्रसंस्करण इकाइयों में स्थानीय कच्चे माल की खपत की गुंजाइश भी बनती है।
पीएमएफएमई योजना खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी सूक्ष्म इकाइयों को अनुदान सहित बैंक ऋण दिलाने के लिए चलाई जा रही है। मुरैना में इस तरह की इकाई शुरू करने के इच्छुक लोग जिला स्तर पर योजना से जुड़े विभागीय कार्यालय या संबंधित बैंक शाखा से पात्रता और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी ले सकते हैं।


